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राजमहल एवं मंदिर नवरतनगढ़

ASI राजमहल एवं मंदिर परिसर

पुरालेख चित्र

राजमहल एवं मंदिर परिसर नवरतनगढ़ (डोइसागढ़)

नवरतनगढ़, सिसई तहसील मुख्यालय से 15 किलोमीटर तथा जिला मुख्यालय गुमला से 45 किलोमीटर की दुरी पर अवस्थित है । यह राज्य की राजधानी से लगभग 75 किलोमीटर पश्चिम में है । यह स्थल समीपवर्ती कुछ अन्य इमारतों व स्थलों के साथ नवरतनगढ़ के नाम से विख्यात है । उत्तर मध्यकाल में यह नागवंशी राजाओं की राजधानी थी । एक पंरपरा के अनुसार नाग राजवंश के 49 वें शासक (नागपुरिया नागवंशावली के अनुसार) श्री महाराज रघुनाथ शाह ने 18 वीं सदी ई. के प्रारम्भ में इन भवनों एवं मंदिरों का निर्माण कराया था, जैसा कि वहां के कुछ लेखों में वर्णन है । जबकि एक दुसरी परंपरा के अनुसार नागपुरिया नागवंशावली के 45 वें राजा दुर्जनशाल ने इन भवनों का निर्माण करवाया था । ऐसा कहा जाता है कि मुगलों ने दुर्जनशाल को हरा कर ग्वालियर किले में कैद कर लिया था । राजा दुर्जनशाल की हीरों की परख की प्रतिभा को देखते हुये बाद में उसे कैद से मुक्ति मिल गई थी । वहां से लौटने के पश्चात राजा दुर्जनशाल ने 17 वीं शताब्दी के मध्य में इन भवनों एवं मंदिरों का निर्माण करवाया । उपरोक्त दोनों ही परंपराओं के अनुसार राज परिवार इस स्थान पर बहुत ही कम समय तक रुके, क्योंकि एक ब्राह्मण ने इस स्थल को अशुभ कहा था और उन्होने अपनी राजधानी पालकोट स्थानांतरित कर दी ।

नवरतनगढ़ में कुल तीन अभिलेख पाये गये हैं । इनमें से दो भगवान जगन्नाथ के मंदिर में विद्यमान है । प्रथम अभिलेख से यह सूचना मिलती है कि राजकीय धर्मगुरु श्री हरिनाथ के द्वारा संवत 1739 या 1683 ई. सन में निर्मित यह मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित था । दूसरा अभिलेख यह बताता है कि राजा रघुनाथ ने संवत 1739 अथवा 1683 ई. में शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान श्री कृष्ण के इस मंदिर का निर्माण कराया था । तीसरे अभिलेख के कुछ अक्षर लुप्त हो गये हैं तथापि यह जानकारी मिलती है कि हरिनाथ देव ने अपने भाई गोकुल नाथ के साथ मिलकर संवत 1767 अथवा 1711 ई. में इस मंदिर का निर्माण कराया था ।

नवरतनगढ़ के महल एवं मंदिर के वर्तमान परिसर में निम्नांकित 10 मुख्य स्मारक है :

1. जगन्नाथ मंदिर संख्या -1,   2. रानी लुकाई,   3. कमल शाही महल,   4. योगी मठ   5. शाही सरोवर,   6. शाही महल,   7. लोहू थोपा मठ,   8. शैलकृत योनिपीठ के साथ शिवलिंग,   9. शैलकृत भगवान गणेश की प्रतिमा,   10. जगन्नाथ मंदिर संख्या -2